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मंजरी सिन्हा का लेख : मल्हार राग में बारिश का मनोरम चित्रण

उस्ताद मुश्ताक अली खां के नाम पर उनके शिष्य पं. देबव्रत (देबू) चौधरी द्वारा स्थापित उमक सेंटर फॉर कल्चर ने मुश्ताक अली खां की 105वीं और पं. देबू चौधरी की 81वीं जयंती पर अपना वार्षिक संगीतोत्सव हैबिटाट सेंटर के मुख्य सभागार में पिछले दिनों आयोजित किया। द्विदिवसीय समारोह पं. प्रतीक चौधरी के निर्देशन में एक […]
Author नई दिल्ली | June 6, 2016 03:40 am
मुश्ताक अली खां (file photo)

उस्ताद मुश्ताक अली खां के नाम पर उनके शिष्य पं. देबव्रत (देबू) चौधरी द्वारा स्थापित उमक सेंटर फॉर कल्चर ने मुश्ताक अली खां की 105वीं और पं. देबू चौधरी की 81वीं जयंती पर अपना वार्षिक संगीतोत्सव हैबिटाट सेंटर के मुख्य सभागार में पिछले दिनों आयोजित किया।

द्विदिवसीय समारोह पं. प्रतीक चौधरी के निर्देशन में एक वाद्यवृंद रचना ‘सोल आॅफ इंडिया’ से शुरू हुआ। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और वैष्णव जन जैसे भजन आदि से लेकर पं. देबू चौधरी के बनाए राग अनुरंजनी में सरगम सहित देश के हर भाग के लोक संगीत और गायन, सितार, वायलिन, बांसुरी, तबला, ढोलक से लेकर गिटार, कीबोर्ड, ड्रम, आॅक्टोपैड और देजेम्बे तक की गूंज सुनाई दीं। इस शुरुआत के बाद पं. देबू चौधरी के सितार वादन ने उद्घाटन संध्या को सुरीले अंजाम तक पहुंचाया।

पंडित जी ने अपने पिता विश्वेश्वर चौधरी की याद में स्वरचित राग विश्वेश्वरी बहुत मन से बजाया। तबले पर उस्ताद अकरम खां ने बेहद संतुलित और समादरयुक्त संगति की। तानपुरे पर उनकी शिष्या पांचाली और स्वर मंडल पर नीलरंजन भी उन्हीं के शागिर्द थे।

समारोह की परिकल्पना इस तरह की गई थी की अगले दिन गुरु-शिष्य परंपरा की अगली पीढ़ी के कलाकारों का प्रदर्शन हो। इस शाम का प्रभावशाली शुभारंभ मिश्र बंधुओं के शिष्य और पं. राजन मिश्र के सुपुत्र ऋतेश और रजनीश मिश्र ने राग पूरिया धनाश्री से किया। झपताल और तीन ताल में दोनों ही बंदिशें रामदास की सुंदर रचनाएं थीं और उनके माध्यम से इस होनहार गायक जोड़ी ने राग का विस्तार बेहद सलीके से कर के विविध तानों की तैयारी से मुख्य राग जमा दिया। इसके बाद मियां मल्हार की तीनताल बंदिश में वर्षा ऋतु के उमड़ते घुमड़ते बादलों और रिमझिम से लेकर धुआंधार बारिश तक का मनोरम चित्र खींचा। उनके साथ जाकिर धौलपुरी के हारमोनियम और दुर्जय भौमिक के तबले पर सधे हाथों ने भी अपना कमाल दिखाया।

इसके बाद पं. देबू चौधरी के सुपुत्र और शिष्य प्रतीक चौधरी ने सितार पर राग बिहाग बजाया। उनके साथ तबले पर रफीउद्दीन साबरी ने भी अपने जौहर दिखलाए। तीसरे कलाकार थे पं. बिरजू महाराज के सुपुत्र और शिष्य दीपक महाराज, जिन्होंने कथक नृत्य का प्रदर्शन किया। मंच पर चल रहे कार्यक्रम ही नहीं, उसे देखने आए संगीत जगत के सितारे भी उतने ही दर्शनीय थे। पं. देबू चौधरी और उनके अभ्ययगत अतिथि बांग्लादेश के राजदूत के अलावा इन दिग्गजों में सपत्नीक उस्ताद अमजद अली खां, पं. साजन मिश्र, पं. बिरजू महाराज, उस्ताद हशमत अली खां और दिल्ली विश्व विद्यालय के संगीत संकाय के लगभग सभी प्राध्यापक थे।

(मंजरी सिन्हा)

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