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नृत्य समारोह में मनभावन प्रस्तुतियां

स्वात, पाकिस्तान में जन्मी पर्णिया कुरेशी ने बचपन से ही कुचिपुडी नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। पेशकश दो खंडों में थी। पहले हिस्से में पर्णिया ने कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया।
स्वात, पाकिस्तान में जन्मी पर्णिया कुरेशी ने बचपन से ही कुचिपुडी नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। पेशकश दो खंडों में थी। पहले हिस्से में पर्णिया ने कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया।

इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित नृत्य समारोह में ‘चांदनी रातें’ नृत्य प्रस्तुति पेश की गई। इसे कुचिपुड़ी नृत्यांगना पर्णिया कुरेशी ने पेश किया। स्वात, पाकिस्तान में जन्मी पर्णिया कुरेशी ने बचपन से ही कुचिपुडी नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। पेशकश दो खंडों में थी। पहले हिस्से में पर्णिया ने कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया। इसका आरंभ उन्होंने गीत ‘आ पिया इन नैनन में’ पर आधारित नृत्य से किया। सूफी रचना पर उन्होंने मधुर भक्ति के भावों को अभिनय के जरिए दर्शाया। उनकी दूसरी पेशकश जतीस्वरम थी। यह राग मंदारी और आदि ताल में निबद्ध थी। जतीस्वरम में तकनीकी पक्ष की प्रधानता होती है। नृत्यांगना गले, आंखों, भौहों, हस्तकों, अंगों के संचालन और पैर की गतियों के जरिए लयात्मकता को दर्शाती हैं। पर पर्णिया के अंग संचालन में तकनीकी पक्ष की शुद्धता एक सिरे से लगभग गायब नजर आई। कुचिपुड़ी में शरीर और अंगों का झुकाव थोड़ा वृत्ताकार व अधवृत्ताकार होता है, जो थोड़ा भी नहीं था।

उनकी अगली पेशकश ‘गंगा-जमुना तीर’ युगल नृत्य थी। मीराबाई की रचना ‘चलो, मन गंगा जमुना तीर’ पर आधारित थी। यह राग यमन कल्याण और आदि ताल में निबद्ध थी। कृष्ण के भावों को कुचिपुड़ी नृत्यांगना भावना रेड्डी ने पेश किया। गोपिकाओं के यमुना जल में स्नान के दौरान कृष्ण ने वस्त्र हरण कर लिया था, उस प्रसंग को नृत्यांगना पर्णिया व भावना ने पेश किया।

अपनी प्रस्तुति के अगले अंश में नृत्यांगना पर्णिया ने कथक नृत्यांगना व गुरू कुमुदिनी लाखिया की नृत्य रचनाओं को पेश किया। कथक नृत्य शैली में नायिका के भावों को उन्होंने चित्रित किया। शायर फैज अहमद फैज के गजल ‘यूं सजा चांद’ पर आधारित थी। गायिका आबिदा परवीन की गाई गजल को गायिका अदिती शर्मा ने स्वरों में पिरोया। भाव के साथ कुछ टुकड़े और चक्रदार तिहाइयों को पर्णिया ने पेश किया। नृत्य के क्रम में उन्होंने 18, 12 व 36 चक्करों का प्रयोग किया। दूसरी पेशकश अमीर खुसरो रचित तराना थी। इसमें नृत्यांगना रचना ‘दिम-थेई-दिम-ता-ता-ताह्य व ‘ता-थेई-तत्-आ-थेई’ का प्रयोग किया। शायर फैयाज हाशमी की लिखी और गायिका फरीदा खानम की गाई मशहूर गजल ‘आज जाने की जिद ना करो’ को नृत्य में पिरोया। नृत्यांगना पर्णिया ने नायिका के भावों को विवेचित करने का प्रयास किया।

समारोह में नृत्य प्रस्तुति के संगत कलाकारों में शामिल थे-तबले पर प्रणत जोशी व जॉय, मृदंगम पर भास्कर राव, नटुवंगम पर कौशल्या रेड्डी, वायलिन पर वीएसके अन्नादुरई, सारंगी पर कमाल अहमद व बांसुरी पर अनंतकृष्ण ने संगत की। विभिन्न रचनाओं को जयन नागर, अदिती शर्मा और लावण्या सुंदरम ने सुरों में पिरोया।

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